बलात्कार एक जघन्य अपराध इसके मूल कारणों तक जाने में परिवेश ,संस्कार ,शिक्षा , संगति ,शराब कुण्ठित सोच सब को खंघालने का प्रयास किया .
मनोरंजन _मनोरंजन के नित नये साधन बढ़ रहे है क्या ये हमे स्वस्थ मनोरंजन दे रहा है,जीवन के प्रति उल्लास बढ़ा रहा है बिल्कुल .नही .क्षणिक आनन्द ,जल्द ही एक चीज से उबता मन ,चीजो की अहमियत बढ रही है ,रिश्तो में संकीर्णता साफ झलकती है .सिनेमा ,इन्टरनेट
हमारे जीवन के साथ जुडा हुआ है पर कोई चीज बेलगाम हो जाय तो स्थिति भयावह हो जाती है .सिनेमा जहाँ कला ,संस्कृति से सीधा मेल करवाता है वही बढती अश लीलता समाज की सोच को बिगाड़ रहा है .सेंसर को जागरूक ,सख्त होना अनिवार्य हो गया है .खास कर रीजनल भाषाओ की फिल्मे एकदम बेलगाम हो रही है .
समाधान _ परिवार ,माता -पिता समय निकाले अपने बच्चों को गढने के लिए कथाओ .संगीत ,चित्रो से भरा हमारा गौरव पूर्ण इतिहास से परिचत कराये .किसी भी समाज का बुद्धिजीवी वर्ग जब उदासीन हो जाता है उसका ये कहना -मेरे कहने ,करने से क्या होगा ये सोच भी एक प्रकार का अपराध है .समाज में रह कर इसके दुःख ,दर्द से कटकर कैसे साँस ले सकते है .अब नही जागे तो अंधेरा कभी नही मिटेगा।स्वस्थ मानसिकता समाज को मिले इसमे खेल मन्त्रयालय भी बहुत अहम भूमिका निभा सकता है .चीन ,जापान सैकड़ो मेडल ले कर अपने देश का नाम रोशन करते है .हमारे देश में प्रतिभा की कमी नहीं ,बढ़ावा देने वालो की कमी है
अपनी सोच को दो टूक शब्दों में व्यक्त करने का प्रयास किया है . रोज घट रहे इस भयानक अपराध का समाज पुख्ता समाधान चाह रहा है .त्वरित कार्यवाही हो इसी विशवास के साथ अपने महामहिम राष्ट्रपति जी ,मानव संसाधन मंत्रालय को भेज रही हूँ क्यों कि इन्होने बलात्कार के मूल कारणों को ढूढने में जागरूक नागरिको आगे आने को कहा था .
मनोरंजन _मनोरंजन के नित नये साधन बढ़ रहे है क्या ये हमे स्वस्थ मनोरंजन दे रहा है,जीवन के प्रति उल्लास बढ़ा रहा है बिल्कुल .नही .क्षणिक आनन्द ,जल्द ही एक चीज से उबता मन ,चीजो की अहमियत बढ रही है ,रिश्तो में संकीर्णता साफ झलकती है .सिनेमा ,इन्टरनेट
हमारे जीवन के साथ जुडा हुआ है पर कोई चीज बेलगाम हो जाय तो स्थिति भयावह हो जाती है .सिनेमा जहाँ कला ,संस्कृति से सीधा मेल करवाता है वही बढती अश लीलता समाज की सोच को बिगाड़ रहा है .सेंसर को जागरूक ,सख्त होना अनिवार्य हो गया है .खास कर रीजनल भाषाओ की फिल्मे एकदम बेलगाम हो रही है .
समाधान _ परिवार ,माता -पिता समय निकाले अपने बच्चों को गढने के लिए कथाओ .संगीत ,चित्रो से भरा हमारा गौरव पूर्ण इतिहास से परिचत कराये .किसी भी समाज का बुद्धिजीवी वर्ग जब उदासीन हो जाता है उसका ये कहना -मेरे कहने ,करने से क्या होगा ये सोच भी एक प्रकार का अपराध है .समाज में रह कर इसके दुःख ,दर्द से कटकर कैसे साँस ले सकते है .अब नही जागे तो अंधेरा कभी नही मिटेगा।स्वस्थ मानसिकता समाज को मिले इसमे खेल मन्त्रयालय भी बहुत अहम भूमिका निभा सकता है .चीन ,जापान सैकड़ो मेडल ले कर अपने देश का नाम रोशन करते है .हमारे देश में प्रतिभा की कमी नहीं ,बढ़ावा देने वालो की कमी है
अपनी सोच को दो टूक शब्दों में व्यक्त करने का प्रयास किया है . रोज घट रहे इस भयानक अपराध का समाज पुख्ता समाधान चाह रहा है .त्वरित कार्यवाही हो इसी विशवास के साथ अपने महामहिम राष्ट्रपति जी ,मानव संसाधन मंत्रालय को भेज रही हूँ क्यों कि इन्होने बलात्कार के मूल कारणों को ढूढने में जागरूक नागरिको आगे आने को कहा था .
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